केन्द्रीय जल आयोग
केन्द्रीय जल आयोग जल संसाधन के क्षेत्र में भारत का एक प्रमुख तकनीकी संगठन है और वर्तमान में जल संसाधन मंत्रालय, भारत सरकार के सम्बद्ध कार्यालय के रूप में कार्य कर रहा है। आयोग को संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श से बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई, नौ-गमन, पेयजल आपूर्ति और जल विद्युत विकास के प्रयोजन हेतु समूचे देश में जल संसाधनों के नियंत्रण, संरक्षण और उपयोग संबंधी योजनाओं को शुरू करने, समन्वय करने तथा उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य सौंपा गया है। आयोग आवश्यकतानुसार किसी ऐसी योजनाओं का अन्वेषण, निमार्ण और निष्पादन का कार्य भी करता है।
संगठनात्मक ढांचा( संगठन )
केन्द्रीय जल आयोग के प्रमुख, अध्यक्ष हैं, जिनका पद भारत सरकार के पदेन सचिव स्तर का है। आयोग का कार्य तीन स्कंधों अर्थात अभिकल्प एवं अनुसंधान स्कंध, नदी प्रबंधन स्कंध और जल आयोजना एवं परियोजना में बांटा गया है। प्रत्येक स्कंध को पूर्णकालिक सदस्य के प्रभार के अन्तर्गत रखा गया है जिसका पद भारत सरकार के पदेन अपर सचिव के स्तर का है और जिसमें उनको सौंपे गए कार्यों के अधिकार क्षेत्र में आने वाले कार्यों के निपटान के लिए उत्तरदायी अनेक संगठन शामिल है।
मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में एक अलग से मानव संसाधन प्रबंधन युनिट केन्द्रीय जल आयोग के मानव संसाधन प्रबंधन/विकास, वित्तीय प्रबंधन, प्रशिक्षण और प्रशासनिक मामलों पर कार्रवाई करता है। पुणे स्थित राष्ट्रीय जल अकादमी केन्द्रीय और राज्य सरकारों में सेवारत इंजीनियरों को प्रशिक्षण देने के लिए उत्तरदायी है और इसके कार्य सीधे अध्यक्ष के मार्गदर्शन के अन्तर्गत आते है। इसके अलावा कुल मिलाकर नई दिल्ली में मुख्यालय स्थित 19 संगठन है और 13 संगठन भारत के विभिन्न स्थानों परफैलेहुएहैं।
अधिक जानकारी के लिए कृपया सचिव, केद्रीय जल आयोग से सम्पर्क करें।